prakriti par kavita |hindi poem on nature

दोस्तों आपका स्वागत है हमारे ब्लॉग सबकमनोरंजन में |आज हम दो प्रकर्ति से जुड़ी हुई कवितायें लेकर प्रस्तुत हुए हैं |तो पढ़ते हैं हमारी आज की पोस्ट ” prakriti par kavita |hindi poem on nature”

1.

देखो हमारी प्रकर्ति

कितनी सुंदर कितनी रंगमई

देखो हमारी प्रकर्ति

कहीं पेड़ तो कहीं नदी

देखो हमारी प्रकर्ति

कहीं मरु फैले हुए

कहीं उपवन से भरी

कहीं मंडराती तितलियाँ

कहीं शंखो से सजी

देखो हमारी प्रकर्ति

देखो हमारी प्रकर्ति

सुविचार पढ़ें

कहीं घुमड़ आए मेघ काले

कहीं तपति वसुधा भी दिखी

कहीं नाचते मोरों का झुंड

कहीं पर्वत पर शांत हवा बहती

देखो हमारी प्रकर्ति

देखो हमारी प्रकर्ति

इसमे गहरे रहस्य भी कई

कैसे है सीप सुंदर मोती देती

कैसे खिलता कमल कीच में

मीठा शहद कैसे मक्खी निर्मित करती ?

वाह -वाह हमारी प्रकर्ति
वाह -वाह हमारी प्रकर्ति

***************

2.

अगर न होती प्रकर्ति

सोचता हूँ मैं कभी

के अगर न होती प्रकर्ति

तो कैसे मिलती प्रेरणा

एक कवि को लिखने की

हाँ सोचता हूँ मैं कभी

अगर न होती ये नदी

तो कैसे प्रेरणा मिलती

कल- कल बहना ना कभी रुकना

ये देती सीख सदा चलने की

हाँ सोचता हूँ मैं कभी

हाँ सोचता हूँ मैं कभी

अगर ना होते ये वृक्ष

तो कैसे प्रेरणा मिलती

वजन दार ही तो झुकता है

ये देते सीख समृद्ध होकर , भी विनम्र बनने की

हाँ सोचता हूँ मैं कभी

हाँ सोचता हूँ मैं कभी

अगर ना होते ये पुष्प

तो कैसे प्रेरणा मिलती

महकते रहते टूट कर भी

ये देते सीख सदैव खुश रहने की

READ  grandparents day poem in hindi | दादा -दादी के लिये कविता

हाँ सोचता हूँ मैं कभी

हाँ सोचता हूँ मैं कभी

दोस्तों आज की हमारी यह पोस्ट prakriti par kavita |hindi poem on nature आपको कैसी लगी अपने विचार कमेंट करके बतायें |