poem on family | परिवार पर एक कविता

poem on family | परिवार पर एक कविता:

दोस्तों हमारी आज की पोस्ट poem on family | परिवार पर एक कविता है जिसे मैं कई दिनों से लिखने की सोच रही थी |दोस्तों हमारे सब के जीवन मैं family की एक विशेष जगह होती है  और हमारे व्यक्तित्व पर family का बहुत गहरा असर देखने को मिलता है|हर किसी को अपनी family से बहुत कुछ सीखने को मिलता है |समय के  साथ -साथ families छोटी और nuclear होती जा रही हैं जिससे हम भीतर ही भीतर बहुत अकेलापन महसूस करने लगे हैं |

एक जोईंट family से  प्रेरित यह रचना”कितना प्यारा मेरा परिवार “आपको ज़रूर पसंद आयेगी , तो शुरू करते हैं  हमारी आज की यह पोस्ट  poem on family | परिवार पर एक कविता :-

 

poem on family | परिवार पर एक कविता

poem on family “कितना प्यारा मेरा परिवार “

 

कितना प्यारा मेरा परिवार

खुशियों से सजा लगता घर-बार

अगर एक मुझे डांट दे तो

दूजा करने लगता है दुलार

कितना प्यारा मेरा परिवार

घर के मुखिया हैं बाबाजी

उनकी मर्जी के बगैर तो

घर में पत्ता भी न हिले जी

वैसे तो हैं वो 70 वर्ष के

लेकिन सबसे फिट हैं अभी भी

औरों की वो क्लास लगाएँ

पर मुझको दादाजी इतना चाहे

घोड़ा बन जाएँ  मेरे लिए दस बार

कितना प्यारा मेरा परिवार

दादीजी की सुनो अब बात

करती राधे-राधे दिन और रात

या तो बस कामों में लगी रहे

या कभी -कभी थक कर सो जाएँ

जब दादी प्रसाद के लड्डू बनाएँ

मुझ से ना तब रहा जाए

एक बार जब मैं मुस्कुरा दूँ तो

दादी मुझको पहले ही भोग लगाए

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कितना प्यारा मेरा परिवार

poem on family "कितना प्यारा मेरा परिवार "

अब आई चाचा की बारी

पढ़ना लिखना एग्जाम्स की तैयारी

बनना चाहें कलेक्टर चाचा

पर कभी- कभी जो मैं जिद करूँ तो

चाचा कर लेते हैं क्रिकेट की भी तैयारी

मैं हूँ उनका राज दुलारा

मेरी उन्होने है हर बात मानी

रोज खिलाते मुझे चॉकलेट ढेर सारी

कितना प्यारा मेरा परिवार

पापा का भी क्या है कहना

हर समय बस न्यूज़ देखना

वो हैं चलता फिरता अखबार

पर मेरे आगे वो मान लें हार

वीक एन्ड्स पर हम घूमने जाएँ

मस्ती करें और रेस लगाएँ

जब पापा मेरे संग खेले तो

 ऑफिस की मीटिंग भी भूल जाएँ

कितना प्यारा मेरा परिवार

माँ है मेरी सबसे खास

पूरे परिवार को है उसपे नाज़

घर ऑफिस को अच्छे से संभाला

ममता की भी याद उसे एक एक बात

माँ मुझको रोज शाम पढ़ाये

मेरी हर एक प्रोब्लम सुलझाये

अब मैं थोड़ा बड़ा हो गया

फिर भी बाँहों में भर कर के सुलाये

कितना प्यारा मेरा परिवार

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