hindi divas ke liye kavita| हिन्दी दिवस पर कविता

hindi divas ke liye kavita| हिन्दी दिवस पर कविता:

 

हिन्दी मेरे देश के प्राण

ये ही है मेरा अभिमान

सरल और कितनी मीठी है

यह भारत के जन- जन की जुबान

दादी नानी ने सुनाई

हिन्दी में कितनी कहानियाँ

जब स्कूल में पहले दिन पहुंचे

मैडम ने भी सिखाया क ख ग

भाषाएँ बहुत हैं दुनिया में

मगर हिन्दी का अलग रुतवा

भारत की राष्ट्रीय भाषा है

इसके प्रेम से बच्चा-बच्चा जुड़ा

कितनी भी विदेशी भाषा आ जायेँ

कोई इसका स्थान नही ले सकता

हिन्दी हिंदुस्तान के कण कण में बसी

यह तो अन्य भाषाओं की है माता 

हिन्दी मेरे देश के प्राण

ये ही है मेरा अभिमान

सरल और कितनी मीठी है

यह भारत के जन- जन की जुबान

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