मदर डे के लिए कविता | ऐ माँ ये तेरी कैसी मौहब्बत है

मदर डे के लिए कविता | ऐ माँ ये तेरी कैसी मौहब्बत है:

मदर डे के लिए कविता | ऐ माँ ये तेरी कैसी मौहब्बत है

दोस्तों मदर डे के लिए कविता | ऐ माँ ये तेरी कैसी मौहब्बत है  हमारी आज की यह कविता  मदर  डे  के लिए  है  जिसमे एक बालक अपनी माँ के प्रेम और वात्सल्य को शब्दों में बताने की कोशिस करता है |वो माँ के साथ बिताए खट्टे मीठे पलों को भी बताता है जब माँ ने उसे कभी प्यार से  तो कभी डांट से जीवन को जीने के सही रास्ते को समझाया |

दोस्तों माँ एक ऐसा शब्द है जिस पर जितना लिख सको उतना ही कम है हमारे इस ब्लॉग में आपको माँ पर बहुत सारी कविताएं मिलेंगी जिन्हे आप मदर डे 2018 के दिन अपनी प्यारी माँ को भेज सकते हैं|दोस्तों हम आपको फिर से याद दिलाना चाहते हैं की इस साल मदर डे  13 मई को मनाया  जाएगा,  तो आप सब अभी से तैयारी शुरू कर दीजिये mother’s day के इस special festival की |

मदर डे के लिए कविता | ऐ माँ ये तेरी कैसी मौहब्बत है:

“” ऐ माँ ये तेरी कैसी मोहब्बत है

जी चाहता हर दम इबादत करूँ मैं तुम्हारी

ऐ माँ ये तेरी कैसी मोहब्बत है

जो कभी भो लफ्जों में बयां नहीं हो पानी

जो पढ़ता नहीं तो डांट देती

और ज्यादा देर पढ़ता तो वो समझती बेटा

कुछ देर आराम कर ले या कुछ खा ले

कहीं कोई गाड़ी तो तेरी नहीं है छूटने वाली

कभी ज्यादा बड़ी गलती मुझ से होती

तो पहले पापा से पिटाई करवाती

और बाद में अपने आँचल से आँसू पोंछ

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मुझे अपने हाथों से खाना भी खिलाती

जब पापा की नौकरी छूट गयी

ना जाने तुमने कैसे घर को चलाया

हम को तो हर दिन तुमने खिलाया

और खुद व्रत का बहाना बना थी भूखी सो जाती

जब बुखार मुझे कभी होता

तो उड़ जाती नींद भी तुम्हारी

घंटो माथे पर गीली पट्टी हो रखती

किस मिट्टी से बनी हो तुम जो थकती नहीं

काया ये तुम्हारी

ऐ माँ ये तेरी कैसी मोहब्बत है

जी चाहता हर दम इबादत करूँ मैं तुम्हारी

ऐ माँ ये तेरी कैसी मोहब्बत है

जो कभी भो लफ्जों में बयां नहीं हो पानी “”

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