गणतन्त्र दिवस पर कविता | poem on republic day

दोस्तों आप सब भारतवासियों को गणतन्त्र दिवस की हार्दिक बधाई हो |मित्रों 26 जनवरी  1950 को हमारे  देश का संविधान लागू हुआ था और देश पूर्ण रूप से स्वायत गणराज्य  घोषित किया गया था ,इस कारण  हमारे देश में हर वर्ष इस दिन को गणतन्त्र दिवस (republic day )  के रूप में मनाते  हैं |इस दिन प्रधानमंत्री लाल किले (दिल्ली ) की प्राचीर से भाषन देते हैं और तिरंगे को फहराते हैं और अनेकों स्कूल के बच्चे तथा विभिन्न राज्यों से आए लोग विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक झाँकियाँ प्रस्तुत करते हैं जो कि विजय चौक से लेकर लाल किले  तक चलती है |गणतन्त्र दिवस पर  प्रधानमंत्री को 21 तोपों कि सलामी दी जाती है और सेना कि तीनों टुकड़ियाँ अपना -अपना शक्ति प्रदर्शन भी करती हैं |गणत न्त्र दिवस पर  किसी न किसी देश के  राष्ट्र- अध्यक्ष  भी आते हैं और इस कार्यक्रम में अतिथि बनते हैं|

गणतन्त्र दिवस के मौके पर ही देश के वीर बच्चों को भी वीरता पुरस्कार से सम्मानित भी किया जाता है|इस दिन स्कूल तथा दफ्तरों में भी तिरंगा फहराया जाता है तथा मिठाई आदि बांटी जाती है |इस दिन दिल्ली के सड़कें तथा सरकारी कार्यालय दुल्हन कि तरह सजे प्रतीत होते हैं |

गणतन्त्र दिवस के दिन प्रधानमंत्री राज-घाट और अमर ज्योति पर जाकर देश के शहीदों को भाव-भीनी श्रद्धांजलि भी देते हैं|

republic day के ही दिन हमारे देश के वीर पुलिस कर्मियों तथा सेनिकों को भी विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है|पूरे देश में राष्ट्र भक्ति की एक लहर सी दौड़ जाती है इस विशेष राष्ट्रीय पर्व के दिन |

READ  hindi poem on dog | पालतू कुत्ते पर एक कविता

गणतन्त्र दिवस पर कविता | poem on republic day

गणतन्त्र का ये राष्ट्रीय त्यौहार

चलता रहे यों ही सालों – साल

वैसे तो है मेरा देश बहुत महान

और प्रगति करे यह हर नए दिन

बहुत देशप्रेमियों ने जीवन गवाया

तब जाकर ये खुशमय दिन आया

हमने देश गणतन्त्र जो है पाया

स्वतन्त्रता-सेनानियों ने पुरजोर लगाया

कर दिया मरकर भी हमारे हवाले वतन

विदेशियों को खदेड़ -खदेड़ बाहर भगाया

अब यह है हम सब की जिम्मेवारी

सजाएँ सँवारे हम अपना यह चमन

हर कदम पर स्वच्छता को अपनाएं हम

कि  देश लगने लगे एक मनोहर उपवन

पहले तो था हमारा देश सोने की चिड़िया

अब मजबूत अर्थव्यवस्था बनकर के उभरे हम

छोड़कर धर्म -जाति की उलझने

एक सुर और ताल ही छेड़ें हम

इंसानियत का हो एक दूजे से रिश्ता

हिंदुस्तानी ही बस सारे कहलायें हम

साक्षर बने भारत का हर बच्चा

  लड़कियां भी यहाँ की न किसी से हैं कम

प्रतिभा की नहीं  है कमी यहाँ पर

इस देश में हैं बहुत सारे युवा-जन

सब भारतवासी लें गणतन्त्र-दिवस पर यह प्रण

                        विश्वगुरु भारत को  मिलसब बनाएँगे हम

प्रिय पाठकों आपको यह कविता अच्छी लगे तो इसे मित्रों को ज़रूर शेयर करें, जय हिन्द ,वंदे मातरम |आप यह भी पढ़ सकते हैं:-

वर्षा ऋतु पर कविता 

छमा और दया पर सुविचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *